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* आलसी राजा *

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बहुत पुरानी बात है एक राजा था वह बहुत आलसी था वह कोई भी काम समय पर नहीं करता था इसलिए उसके राज्य में अव्यवस्था फैली हुई थी वह अपना काम हमेशा कल पर टालता रहता था......... उस की तीन रानियां थी उसमें से सबसे बड़ी रानी जिसका नाम नानावती था वह बहुत समझदार और होशियार थी...... राजा के आलसी पन से सारे दरबारी, मंत्री और उसकी रानियां सभी बहुत परेशान रहती थे ..... उन्हें हमेशा यह डर सताता रहता था कि कहीं कोई राजा के आलसी पन का फायदा उठाकर राज्य पर आक्रमण ना कर दे लेकिन राजा को कोई चिंता नहीं थी वह आराम से खाता - पीता और सोता रहता था कई बार मंत्रियों ने राजा को राज्य की सच्चाई से अवगत कराना चाहा परंतु राजा उसकी बात बीच में ही काट देता था और कहता था कि...... सब कुछ ठीक हो जाएगा, मैं सब संभाल लूंगा, आखिर वह राजा था उसके सामने कौन यह हिम्मत जुटा पाता कि उसके खिलाफ कोई बोले........ धीरे-  धीरे दिन बीतते जा रहे थे राजा को जब जिस चीज की जरूरत होती उसे वह समय पर मिलता था अब उसे और क्या चाहिए था...... उसके आसपास क्या हो रहा है उसने कभी भी जानने की कोशिश नहीं की........ जिस राज्य का रा...

* प्रयाश्चित *

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  कभी-कभी जाने अनजाने हमसे गलती हो जाती है जो पूरी जिंदगी हमारा पीछा करती रहती है हम चाहे जितनी कोशिश कर ले पर यह हमारा पीछा नहीं छोड़ती..... मैं बहुत छोटा था करीब 7 साल का रहा हूंगा यह तब की बात है.... मैं मम्मी पापा के साथ चिड़ियाघर देखने गया था पापा की रविवार को छुट्टी रहती है पापा हर रविवार को हमें घुमाने ले जाते थे उस दिन भी हर रविवार की तरह पापा हमें घुमाने ले जा रहे थे...... पहले हम बाजार गए वहां से मम्मी ने खाने - पीने की कुछ चीजें खरीदी वही मैंने एक खिलौने की दुकान देखी मैंने खिलौने लेने की जिद की तो पापा उस दुकान पर मुझे ले गए वहां मुझे एक छोटी सी पिस्तौल पसंद आ गई  जिसके साथ छोटी -छोटी प्लास्टिक की गोलियां थीं ..... पापा ने मना किया कि यह नहीं लेना इससे किसी को चोट लग जाएगी पर मैंने जिद की तो उन्होंने हां कर दी और कहा कि तुम इससे किसी को नुकसान नहीं पहुंचओगे, मैंने उनसे वादा किया कि मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगा फिर वहां से हम चिड़ियाघर आ गए.... वहां पर कई तरह के जानवर थे मुझे बड़ा मजा आ रहा था मैं घूमते - घूमते थक गया और मुझे भूख भी लग रही थी मैंने मां स...

* अहसास *

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                      टीनू एक नासमझ लड़की थी पढ़ने - लिखने में भी उसका कुछ ख़ास मन नहीं लगता था ! माँ उसे हमेशा घर का पता  और मोबाइल नम्बर याद करवाने की कोशिश करतीं रहतीं थीं, पर टीनू थी कि हमेशा टाल देती थीं  ! टीनू के पिता बचपन में ही गुजर गए थे इसीलिए टीनू लाड - प्यार में थोड़ा बिगड़ गई थी, 1 दिन की बात है टीनू रोज की तरह स्कूल बस से वापस घर आ रही थी बस से नीचे उतरी तो उसने एक खरगोश के बच्चे को देखा, वह सफेद रंग का खूबसूरत नीली आंखों वाला खरगोश का बच्चा था उस बच्चे से थोड़ी दूरी पर उसकी मां घास खा रही थी ! टीनू ने बच्चे को देखा तो उससे रहा नहीं गया वह उसे पकड़ने की कोशिश करने लगी !....थोड़ी देर बाद उसने बच्चे को पकड़ लिया और उसे अपने साथ घर ले आई.... जो कि वहां से बस कुछ ही दूरी पर था टीनू की माँ नें खरगोश के बच्चे को टीनू के हाथ में देखा तो बोली....... टीनू.. ... इसे तुम कहां से ले आई ........ टीनू -....... यह मुझे यही पास में मिला ! मां -...इसे जाकर फौरन...