* मैं नारी ही तो हूँ *
आज नारी हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है, और उन्हें आजादी है कि वह अपनी जिंदगी अपनी मर्जी से जी सकती हैं ! दुनिया में उनका भी पुरुषों के बराबर मान - सम्मान है, बराबर का अधिकार है आप सब ने भी इसी तरह की बड़ी - बड़ी बातें सुनी होंगी आपको क्या लगता है, इसमें कितनी सच्चाई है, मैं मानती हूं कि आज हर क्षेत्र में नारी है, लेकिन क्या उसे पुरुषों के बराबर इज्जत मिलती है ? क्या उन लोगों को भी उसी सम्मान की नजर से देखा जाता है जैसे एक पुरुष को देखा जाता है ? मैं ऐसा नहीं मानती ज्यादातर पुरुष यह बर्दाश्त नहीं कर सकते कि उनकी पत्नी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चले, समाज में उसे भी रुतबा, नाम, मान -सम्मान मिले अगर औरत इस काबिल बन भी गई तो हर वक्त उसे यह एहसास कराया जाता है कि वह एक नारी है, दुर्बल, बेचारी, बेसहारा, लाचार है वह पुरुष नाम की बैसाखी के बिना नहीं चल सकती किंतु पुरुष यह भूल जाते हैं कि वह नारी ही है जिसने उन्हें जन्म दिया, वह नारी ही है जिसने उनके बच्चों का पालन पोषण किया, वह नारी ही है जिससे उनका वंश आगे चल रहा है ! हम चाहे जितन...
Comments
Post a Comment