*आस्था *
जब बात आस्था और प्रेम की आती है तो मुझे वह दिन याद आता है जब हमारे गांव में वह बुजुर्ग आए थे जिन्हें कोई नहीं जानता था और ना ही उन्होंने किसी को अपना परिचय दिया था ! अपने गांव के प्रति उनकी आस्था 20 सालों बाद उन्हें वहां लेकर आई थी !
गर्मियों के दिन थे 1 दिन सुबह - सुबह मैं दातून कर रहा था तभी मैंने देखा कि एक बुजुर्ग जिनके कपड़े मैले थे और जगह-जगह फटे हुए थे सामने आकर खड़े हो गए ! उन्होंने मेरी ओर देखा और बोले -...पीने के लिए पानी मिलेगा क्या ? मैंने उनकी तरफ ध्यान से देखा मैं उन्हें पहचानने की कोशिश कर रहा था पर इससे पहले मैंने उन्हें कभी नहीं देखा था ! मैंने कुएं से पानी निकाल कर उन्हें पिलाया ! वह बोले भगवान तुम्हें हमेशा खुश रखे.... यह कहकर वह जंगल की तरफ चले गए मैं उन्हें जाते हुए देखता रहा मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि वह यहां ऐसे गांव में क्यों आए हैं जहां के लोगों में एक दूसरे के प्रति गुस्सा जलन और एक दूसरे को जान से मार देने की भावना हो हर व्यक्ति यहां अपने आप में राजा था किसी को किसी की नहीं पड़ी थी आज तक गांव में ना अस्पताल था ना विद्यालय और ना ही पक्की सड़के थी शहर आने जाने के लिए कोई वाहन भी नहीं था पर इससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता था !
एक दिन की बात है मेरे बाबा खेतों में काम कर रहे थे वहीं पर मैं लकड़ियां काट रहा था अचानक कुल्हाड़ी मेरे हाथ से छूट गई और मेरे पैर पर आ कर गिरी !मेरा पैर बुरी तरह जख्मी हो गया ! उससे लगातार खून बह रहा था, मैं तड़प गया बाबा ने देखा तो दौड़ कर मेरे पास आए उन्होंने खेतों में इधर उधर देखा, आसपास के सभी लोग अपने -अपने काम में व्यस्त थे उनसे मदद की उम्मीद करना बेवकूफी थी बाबा ने झटपट बैलगाड़ी में मुझे लिटाया और तेजी से शहर की तरफ रवाना हो गए !
शहर का रास्ता जंगल के बीच से होकर गुजरता था बाबा जल्दी-जल्दी बैलों को हांक रहे थे अभी हम जंगल के बीच ही पहुंचे थे की बाबा ने बैल गाड़ी रोक दी और जोर से चिल्लाए....... हट जाओ मेरे रास्ते से..... मुझे मेरे बेटे को अस्पताल ले जाना है..... थोड़ा रुक कर...... सुनाई नहीं देता क्या ? अगर अब भी नहीं हटे तो मैं तुम्हारे ऊपर से बैलगाड़ी निकालकर ले जाऊंगा...... मुझे तकलीफ हो रही थी पर फिर भी मैंने किसी तरह अपने आप को संभालते हुए गर्दन उठाकर देखा... कि आखिर यह कौन है..... जो हमारा रास्ता रोककर खड़ा है..... मुझे देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ ! कि यह वहीं बुजुर्ग थे जिन्हें मैंने पानी पिलाया था ! उन्होंने बड़ी विनम्रता से कहा..... मैं आपकी मदद करना चाहता हूं..... बाबा - देखो मैं बहस नहीं करना चाहता, मेरे बेटे को डॉक्टर की जरूरत है, बस तुम जल्दी से हमारे रास्ते से हट जाओ...... बुजुर्ग - आप मेरा यकीन करें, मैं सच में आपकी मदद करना चाहता हूं....... बाबा का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया, वह दांत पीसते हुए बोले........ तुम हमारी मदद करोगे...... हां..... तुमने कहा और मैं मान लूंगा...... तुमने यह सोचा भी कैसे ? तुम इसलिए खड़े हो ना कि मेरे बेटे को शहर जाने से रोक सको..... और उसके साथ कुछ बुरा हो जाए..... पर ऐसा नहीं होगा अब मैं और नहीं रुक सकता, अब तो मैं तुम्हारे ऊपर से ही बैलगाड़ी निकाल कर ले जाऊँगा.. ... इतना कहकर जैसे ही बाबा ने बैलों को हाँका, तभी वह बुजुर्ग बोलें..... एक बार आप मेरी बात पर विश्वास तो करें..... मैं भी यहीं हूं, और आप भी यही हैं, भगवान ना करे, कि अगर आपके बेटे को कुछ हो गया तो आप मेरे प्राण ले लेना..... मैं कराह रहा था बाबा ने पलटकर मेरी तरफ देखा, और बैलगाड़ी से नीचे उतर गए, वह उस बुजुर्ग के पास गए..... और बोले आखिर कौन सी दुश्मनी है तुम्हारी मेरे बेटे से जो तुम हमें इस तरह से परेशान कर रहे हो ? वह बुजुर्ग कुछ नहीं बोले, वह चुपचाप मेरे पास आए,..... बाबा उनके पीछे -पीछे आ रहे थे, बुजुर्ग ने बड़े प्यार से मेरे कंधे पर हाथ रखा, और बोले....... क्या तुम मुझ पर विश्वास करोगे, मैं चाह कर भी उनके प्रश्न का उत्तर नहीं दे पाया और एक टुक उन्हें देखता ही रह गया ! उन्होंने सहारा देकर मुझे बैलगाड़ी से नीचे उतारा, और बाबा से बोले क्या आप मेरे आश्रम तक इसे ले जाने में मेरी मदद करेंगे ? बाबा ठीक है करता हूं, पर याद रखना मेरे बेटे को कुछ भी हुआ ना....... कहते हुए चुप हो गए !
अब मैं उस बुजुर्ग के आश्रम में था, उन्होंने मुझे फर्श पर लिटाया और फिर मेरे जख्म को ध्यान से देखा बोले...... गहरा घाव है टांके लगाने पड़ेंगे, फिर वह एक डिब्बा ले आए उससे उन्होंने रुई निकाली और कोई दवा उस में डालकर मेरा घाव साफ किया फिर इंजेक्शन भरकर मुझे लगाया, थोड़ी देर बाद टांके लगा दिए, मैं और बाबा उन्हें आश्चर्य से देख रहे थे बाबा कौन हो तुम ? क्या कोई डॉक्टर हो ?अगर हो तो तुम्हारा यह रूप...... थोड़ा रुक कर...... आखिर तुम्हारी सच्चाई क्या है ? वह बुजुर्ग कुछ नहीं बोले उन्होंने मुझे कुछ दवाएं दी, कहा समय पर खाते रहना तुम जल्द ही ठीक हो जाओगे फिर बाबा से बोले...... मैंने अपने वादे के मुताबिक आपके बेटे का इलाज कर दिया अब आप इसे घर ले जा सकते हैं !
बाबा ने बुजुर्ग से कई बार उनके बारे में पूछा, पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया ! बाबा मुझे वापस गांव ले आए, मैं रास्ते भर उनके बारे में सोचता रहा कि यह आखिर कौन है ?और यहां इस तरह क्यों रह रहे हैं ? कुछ ही दिन में मेरा पैर बिल्कुल ठीक हो गया , लेकिन मेरे मन में बुज़ुर्ग के बारे में जानने की बड़ी उत्सुकता थी मैं उनके बारे में जानना चाहता था पर समझ नहीं पा रहा था कि कैसे.....
एक दिन मैंने फिर उन्हीं बुजुर्ग को देखा वह हमारे गांव में एक पेड़ के नीचे बैठे हुए थे और उनके आसपास बच्चे भीड़ लगा कर बैठे थे, मैं उनके करीब जाकर बैठ गया... पर उन्होंने तो जैसे मुझे देखा ही नहीं था..... वह बच्चों को कहानी सुना रहे थे और बच्चे खुश हो कर उनकी कहानी सुन रहे थे..... तभी उन बच्चों के पिता वहां आ गए, और अपने -अपने बच्चों का हाथ पकड़ कर ले जाने लगे..... बच्चे बोले -......हमें कहानी सुननी है..... हम नहीं जाएंगे... एक व्यक्ति बोला- ऐ ....... तुम कौन हो ? और बच्चों को क्या पट्टी पढ़ा रहे हो ? बुजुर्ग बोले भाई...... बच्चे झगड़ा कर रहे थे, तो मैंने उनकी....... बात पूरी भी नहीं हुई थी कि वह व्यक्ति फिर से बोला-..... अच्छा..... तो तुम न्यायाधीश हो, जो फैसला करने आ गए....... बुजुर्ग-..... आप तो बेकार नाराज हो रहे हैं, मैं तो बस उन्हें झगड़ा करने से रोकना चाहता था ! बड़े आए हमारे बच्चों की फिक्र करने वाले....... इससे पहले तो तुम्हें नहीं देखा.......... कहां से मुंह उठाकर चले आए हो....... भिखारी कहीं के........ तुम्हें यहां से कुछ नहीं मिलेगा....... जहां से आए हो वहीं वापस चले जाओ, वरना भूखे मर जाओगे........ यह कहकर सभी अपने बच्चों को वहां से लेकर चले गए !
अब मैं और वह बुजुर्ग बस दो ही लोग वहां पर रह गए थे, मैंने उनको धन्यवाद करते हुए कहा..... आपका बहुत- बहुत धन्यवाद, आपने उस दिन जो मेरे लिए किया.... पर उन्होंने जैसे मेरी बात ही नहीं सुनी थी वह तो जैसे अपने आप में ही कहीं खोए थे..... उनके मुंह से बस यह निकला, आज भी यहां कुछ नहीं बदला, आज भी सब कुछ वैसा ही है जैसा 20 साल पहले था, उनकी यह बात सुनकर मैं चौक पड़ा, मैंने उनसे पूछा...... क्या आप यहां पहले भी आ चुके हैं ? उनके चेहरे पर मुस्कान आ गई, बोले..... तुम्हारी उम्र क्या है ? मैंने जवाब दिया..... 20 वर्ष... उन्होंने कहा..... 20 वर्ष पहले मुझे इस गांव से निकाल दिया गया था,....... मगर क्यों ? क्या आप इसी गांव के रहने वाले हैं ? मेरे मुंह से एकाएक ही निकल गया, उनके चेहरे पर उदासी छा गई... आंखों से आंसू छलकने लगे, और वह वहां से उठ कर चले गए !
अब वह अक्सर गांव में आने-जाने लगे, लोग उनसे बात तक नहीं करते थे पर फिर भी वह लोगों के पास बैठते, उनसे बात करने की कोशिश करते, उनके बच्चों को कहानी सुनाते, धीरे - धीरे बच्चे उनसे घुल मिल गए.... गांव वालों को भी अब उनसे एतराज नहीं होता था ! क्योंकि कोई चाहे ना चाहे वह बुजुर्ग तब भी लोगों की मदद करते रहते थे !
वक्त गुजरता जा रहा था और वह बुजुर्ग धीरे-धीरे अपनी बातों से सबको आकर्षित करते जा रहे थे, लोग अब उनकी बातों पर ध्यान देने लगे थे.... अब तो हर शाम बैठक लगती गांव के सभी लोग उस बुजुर्ग के पास आकर बैठते थे..... लेकिन वह आपस में बात नहीं करते थे ! कभी - कभी वह बुजुर्ग कुछ ऐसी बात कर देते कि सभी एक साथ ठहाका लगा कर हंसने लगते लेकिन फिर एक दूसरे की तरफ देखते और मुंह बना कर चुप हो जाते !
एक दिन ऐसे ही सभी शाम को बुजुर्ग के साथ बैठे हुए थे ..... तभी सांप ने एक बच्चे के पैर पर डस लिया बुजुर्ग और उस बच्चे के पिता को छोड़कर कोई भी इस बच्चे के पास नहीं आया ....... बुजुर्ग...... चिल्लाकर बोले...... अरे कोई कपड़ा या बंधन लेकर आओ........... जल्दी .......... बच्चे की पिता की तो जैसे सुध - बुध ही खो गई थी वह चुपचाप वहीं पर बैठे अपने बच्चे को देख रहे थे...... बुजुर्ग फिर से चलाएं....... इसे सांप ने काटा है, अगर जल्दी बंधन नहीं लगाया तो जहर पूरे शरीर में फैल जाएगा,....... अरे आप में से ही कोई बंधन ले आए....... एक व्यक्ति बोला- हम क्यों जाएं ? यह बच्चा हमारा थोड़े ही है ? जिसका बच्चा हो वह खुद जाकर ले आए..... बुजुर्ग-....... कैसी बातें करते हैं आप ? अगर इसकी जगह आप लोगों में से किसी का बच्चा होता तो, तब भी आप सब यही कहते........ हमारे पास वक्त बहुत कम है जल्दी कीजिए....... सभी दौड़कर बच्चे के पास आ गए, एक व्यक्ति ने बंधन लाकर दे दिया बुजुर्ग ने बच्चे के पैर में कई जगह बंधन लगा दिए और सब लोगों से कहा..... मुझे इस बच्चे को बचाने के लिए आप सबकी मदद चाहिए कृपया आप सब मेरी मदद करें..... इस बच्चे को सोने मत दीजिए..... कैसे भी करके इसे जगाए रखिए.... इतना कहकर वह जंगल की तरफ दौड़ गए और इलाज वाला डिब्बा लेकर जल्द ही वापस आ गए...... उन्होंने बच्चे के पैर पर कोई दवा लगाई और चाकू की तरह दिखने वाली चीज से चीरा लगाया.... और दबाकर खून को निकाल दिया उसके बाद उन्होंने उस बच्चे को एक इंजेक्शन लगाया.... सब उन्हें देख कर हैरान परेशान थे कि आखिर यह पागल सा दिखने वाला आदमी यह सब कैसे कर सकता है ! कुछ देर बाद वह बच्चा उठ कर बैठ गया..... सबके चेहरों पर खुशी आ गई !
इससे पहले जब भी कभी किसी को सांप ने डसा था उसे अपने प्राण गंवाने पड़े थे क्योंकि शहर गांव से काफी दूर था और शिक्षा के अभाव के कारण किसी को नहीं मालूम था कि सांप के काटने पर उस जगह से थोड़ा ऊपर कई बंधन बांध देना चाहिए ताकि जहर पूरे शरीर पर ना फैल सके, गांव में वाहन ना होने की वजह से अस्पताल ले जाने में देरी हो जाती थी और मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देता था !
अब वह बुजुर्ग तो जैसे गांव वालों के लिए फरिश्ता ( देवदूत) बन गया था लोग उसकी अब हर बात मानने लगे थे, लोगों के स्वभाव में भी काफी परिवर्तन आ गया था, उनके मन में स्वार्थ और नफ़रत खत्म हो गई थी, वह अब एक दूसरे की मदद भी करने लगे थे यह सब देखकर वह बुजुर्ग बहुत खुश रहता था !
एक दिन एक व्यक्ति ने उनसे सवाल किया..... आपने कभी अपने बारे में नहीं बताया.... आखिर आप कौन हैं ? और कहां से आए हैं ? बताइए ना........ वह बुजुर्ग बोलें..... मैं भी आप में से ही एक हूं, और आप सब मेरे परिवार वालों की तरह हैं
और हां मैं काफी दिनों से आप सब से कुछ कहना चाहता हूं, अगर आप सब इजाजत दें तो आज कह दूं !
मेरे बाबा ने कहा...... कहिए ना..... आप क्या कहना चाहते हैं, बुजुर्ग- क्या आप लोगों को नहीं लगता कि आप सब को भी सारी सुख सुविधा मिलनी चाहिए...... जैसे आपके बच्चों के लिए अच्छे स्कूल, और अस्पताल होने चाहिए ताकि आप के अपनों को जरूरत पड़ने पर कहीं और ना ले जाना पड़े, और सही समय पर उनका इलाज हो सके यहां पर भी पक्की सड़कें हों ताकि वाहनों का आवागवन हो सके, और आप सब को कहीं भी आने-जाने में आसानी हो...... क्या ऐसा हो सकता है मैंने पूछा........ उन्होंने कहा..... क्यों नहीं हो सकता..... अगर आप सब मेरा साथ दे तो यह सब संभव है.... सबने एक आवाज में कहा हम सब आपके साथ हैं !
दूसरे दिन ही उस बुजुर्ग ने कुछ लोगों को वहां बुलाया और कुछ समझाया वह चले गए और कुछ घंटों बाद लौटे तो उनके साथ कई तरह की मशीनें थी, हमारे गांव में काम शुरू हो गया और कुछ ही सालों में हमारे गांव का नक्शा बदल गया वहां पक्की सड़कें स्कूल अस्पताल सब कुछ बन गया था सारे गांव वाले फूले नहीं समा रहे थे और उस बुजुर्ग की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए थे..... सारे गांव वालों ने बुजुर्ग का धन्यवाद किया... बुजुर्ग के मुंह से अचानक निकल आया आज मेरा सपना पूरा हो गया !
बाबा ने सुना तो सवाल किया...... आपका सपना ? यह आपका सपना था...... हमारे गांव से आखिर आपका क्या रिश्ता है और आपने हमारे लिए यह सब क्यों किया ?....... बताइए........ आज तो आपको बताना ही पड़ेगा.... बताइए ना.....
बुजुर्ग के चेहरे पर उदासी छा गई उनकी आंखें नम हो गई....... मैं नहीं जानता कि सच जानकर आप की क्या प्रतिक्रिया होगी...... पर मैं जो करना चाहता था इस गांव के लिए, आप सब के लिए, वह मैंने कर दिया.... अब अगर मेरी जान भी चली जाए तो मुझे कोई गम (दुख) नहीं होगा !
मेरा नाम कपिल है और मैं इसी गांव का बेटा हूं , शायद आप को याद नहीं है.... मेरे बाबा और मैं भी आप सब की तरह इसी गांव में रहते थे मेरी उम्र 10 वर्ष थी, और मेरे बाबा बूढ़े और काफी कमजोर थे हमारी बकरी शेखू चाचा के खेत में चली गई थी और शेखू चाचा ने हमारी बकरी को पीट - पीट कर मार डाला था ! जब बाबा ने उनसे पूछा कि तुम ने बकरी को क्यों मारा..... तो बस शेखू चाचा भड़क गए और वह बाबा को बुरी तरह मारने लगे, मैंने बचाने की कोशिश की तो उन्होंने मुझे भी मारा और कहा कि अगर जिंदा रहना चाहते हो तो इस गांव से चले जाओ और फिर कभी वापस मत आना मैं यहां से नहीं जाना चाहता था, पर बाबा ने मजबूर कर दिया.... तो मुझे जाना पड़ा !
मैं 20 साल इस गांव से दूर रहा पर एक पल के लिए भी इस गांव को नहीं भूल पाया..... आप सब की बड़ी याद आती थी यहां से जाने के कुछ दिनों बाद बाबा गुजर गए और मैं अकेला रह गया, कई बार मन में सोचा कि गांव वापस आ जाऊं पर मैंने जो सपना देखा था अपने गांव के लिए तब मैं उसे पूरा नहीं कर सकता था ! इसीलिए वहां रहकर इस सपने को साकार करने के लिए रास्ता ढूंढने लगा छोटा-मोटा काम करके किसी तरह अपना पेट भरने लगा ! मैं पढ़ना चाहता था पर पैसे नहीं थे इसलिए एक स्कूल के पीछे बैठकर मै बच्चों को पढ़ते हुए सुनता और उसे अपने मन में दोहराता 1 दिन वहां के चपरासी ने मुझे देख लिया और सीधे प्रिंसिपल के पास ले गया उन्होंने मुझसे पूछा.... यहां क्या कर रहे थे ? जी आप लोग जो पढ़ाते हैं मैं उसे सुनकर याद करता हूं, पर अब नहीं आऊंगा आप मुझे मारना मत... मैंने सिर झुका कर कहा, वह अपनी कुर्सी से उठे उन्होंने मेरे सिर पर हाथ फेर कर कहा तुम पढ़ना चाहते हो ? मैंने हां में सिर हिलाया.....तो ठीक है तुम अब सारे बच्चों के साथ उसी कमरे में पढ़ोगे तुम्हें अब पीछे बैठकर पढ़ने की जरूरत नहीं है, पढ़ाई के लिए कॉपी किताब मैं तुम्हें लाकर दूंगा.... यह कहकर वह जाने लगे.. मैंने खुश होकर उनके पैर छुए, उन्होंने मुझे आशीर्वाद दिया कि मैं अपने लक्ष्य को प्राप्त कर पाऊं.. .. बस मैंने मन लगाकर पढ़ना शुरू कर दिया और साथ ही साथ काम भी करता रहा आज प्रिंसिपल के आशीर्वाद और अपनी मेहनत से मैं डॉक्टर हूं और मेरे पास धन - धान्य की कोई कमी नहीं है... मैं अगर चाहता तो वहीं शहर में ही रहता लेकिन मैं ऐसा नहीं कर पाया मैं वहां सिर्फ इसलिए रहा की मैं इस काबिल बन सकूं की बचपन में जो मैंने सपना देखा था उसे पूरा कर पाऊं और आज मेरा यह प्रण पूरा हो गया.. यह कहकर उस बुजुर्ग ने अपने चेहरे से नकली दाढ़ी मूंछ और लंबे बालों की टोपी हटा दी वह एक वयस्क आदमी के रूप में हमारे सामने खड़ा था वह थोड़ा रुक कर फिर बोला.....
मेरा यह सपना था की इस गांव के लोगों में एक दूसरे के प्रति प्रेम और विश्वास की भावना हो और इस गांव के लोगों को भी सारी सुख सुविधा मिले जो हर इंसान चाहता है पूरा हुआ...... अगर आपकी नजर में मैं गुनहगार ( दोषी )हूं तो आप सब मुझे इस गलती की सजा दीजिए मैं तैयार हूं..... मैंने आप सब से सच्चाई छुपाई,..... क्योंकि मैं जानता था कि अगर आप को पता चलता कि मैं ही कपिल हूं तो मुझे फिर से इस गांव से बाहर निकाल दिया जाता क्योंकि इस गांव से जो भी गया वह वापस नहीं आ सकता था.... अब फैसला आपके हाथ में हैं मैंने अपनी सच्चाई आप सब को बता दी...... मेरे बाबा दौड़कर कपिल के पास गए और बोले -.......बेटा माफी तो मुझे तुमसे मागनी चाहिए.... क्योंकि मैंने ही तुम्हें तुम्हारे गांव से दूर किया था,... शायद तुमने मुझे नहीं पहचाना...... मैं ही शेखू हूं..... कपिल -.....पहले दिन से ही आपको देखकर पहचान गया था...... मेरे बाबा.-.... क्या फिर भी तुमने मेरे बेटे का पैर सही करके हमारी मदद की थी.... मेरे इतना गुस्सा करने के बाद भी तुमने उसके ज़ख्मी पैर का बहुत अच्छे से इलाज किया था.... तुम अगर चाहते तो अपने बचपन में हुए उस बर्ताव का मुझसे बदला ले सकते थे. ...... कपिल मेरे बाबा से लिपट गया और बोला -.....चाचा मैंने कहा ना कि मैं आप सब से और हमारे इस गांव से बहुत प्रेम करता हूं तभी तो इतने साल इस गांव और आप लोगों से दूर रहकर भी आप सबको और इस प्यारे से गांव को कभी नहीं भुला और देखिए ना आप सबके बीच वापस आ गया.... कुछ लोगों ने कपिल को गोद में उठा लिया..... सभी के चेहरों पर खुशी थी आज तक गांव वाले जिस खुशी से वंचित थे कपिल की वजह से उन्हें वह खुशी मिल गई !
कपिल की लगन, और उसका गांव और गांव वालों के प्रति उसकी सच्ची आस्था ने उसके विश्वास को टूटने नहीं दिया अपने गांव के प्रति वह जो करना चाहता था उस ने कर दिखाया भले ही उसे यह करने में 20 साल का समय लगा पर उसने सिद्ध कर दिया कि जिसके मन में सच्ची आस्था होती है उसके लिए कुछ भी नामुमकिन (असंभव )नहीं होता वह जरूर कामयाब होता है !.....

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